Indian History GK In Hindi

Indian History GK In Hindi


1.महात्मा गांधी ने कांग्रेस के केवल एक अधिवेशन की अध्यक्षता की थी, वह अधिवेशन किस स्थान पर आयोजित किया गया था?
[A] बेलगाम
[B] फैजपुर
[C] इलाहाबाद
[D] कराची

Correct Answer: A [बेलगाम ]
Notes:
गांधीजी ने कांग्रेस के बेलगाम अधिवेशन की अध्यक्षता की थी, यह अधिवेशन वर्ष 1924 में कर्नाटक के बेलगाम में आयोजित किया गया था?

2.निम्नलिखित में से किसे आर्थिक राष्ट्रवाद का पथ-प्रदर्शक माना जाता है?
[A] मदन मोहन मालवीय
[B] आर.सी. दत्त
[C] बिपिन चन्द्र पाल
[D] गोपाल कृष्ण गोखले

Correct Answer: B [आर.सी. दत्त ]
Notes:
रोमेश चन्द्र दत्त को आर्थिक राष्ट्रवाद का पथ-प्रदर्शक माना जाता है, उन्होंने “The Economic History of India” नामक पुस्तक भी लिखी।


3.इनमे से बंगाल के किस  शासक ने ज़र्बे मुर्शिदाबाद नामक सिक्का जारी किया?
[A] मीर जाफर
[B] मीर कासिम
[C] मुर्शिद कुली खान
[D] शुजा-उद-दीन मुहम्मद खान

Correct Answer: C [मुर्शिद कुली खान ]
Notes:
मुर्शिद कुली खान बंगाल के पहले नवाब थे, उनका कार्यकाल 1717 से 1727 ईसवी तक था। उसने मख्सुदाबाद का नाम बदलकर मुर्शिदाबाद कर दिया। जैसे ही मुग़ल सम्राट फर्रुखसियार ने  नाम परिवर्तन तो मंज़ूरी दी, मुर्शिद कुली खान ने नयी टकसाल से ज़र्बे-मुर्शिदाबाद नामक सिक्के जारी किये।



4.“केवल पागलखाने के बाहर खड़े पागल लोग ही आजादी की बातें कर और सोच सकते हैं”
स्वराज के सन्दर्भ में यह कथन किसने कहा था?
[A] लार्ड हार्डिंग
[B] बाल गंगाधर तिलक
[C] गोपाल कृष्ण गोखले
[D] फ़िरोज़ शाह मेहता

Correct Answer: C [गोपाल कृष्ण गोखले ]
Notes:
1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन होने के बाद, नरम दल का नेतृत्व गोपाल कृष्ण गोखले ने किया। गरम दल के नेताओं द्वारा स्वराज के विचार को बल देने के पर गोपाल कृष्ण गोखले ने उपरोक्त कथन कहा था।

5.नीचे दिए गए विकल्पों का अवलोकन कीजिये :
1 फ्रेंच
2 ब्रिटिश
3 पुर्तगाली
4 डच
सुवाली की लड़ाई उपरोक्त किन के बीच लड़ी गयी?
[A] 1 और 2
[B] 2 और 3
[C] 3 और 4
[D] 1 और 4

Correct Answer: C [3 और 4 ]
Notes:
सुवाली की लड़ाई अंग्रेजों और पुर्तगालियों के बीच 29-30 नवम्बर, 1612 को सूरत के निकट लड़ी गयी। इस लड़ाई से भारत   में पुर्तगालियों का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त होने लगा और दूसरी ओर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का विस्तार शुरू हुआ।


6.1905 में बंगाल के विभाजन के बाद बंगाल में कई आन्दोलन हुए जैसे बहिष्कार, स्वदेशी, राष्ट्रीय शिक्षा इत्यादि। इनमे से “बहिष्कार” आन्दोलन किस से प्रेरित था?
[A] दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गाँधी द्वारा विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार
[B] चीनी लोगों द्वारा अमेरिकी वस्तुओं का बहिष्कार
[C] आयरिश लोगों द्वारा ब्रिटिश लैंड एजेंट्स का बहिष्कार
[D] चीनी लोगों द्वारा जापानी उत्पादों का बहिष्कार

Correct Answer: B [चीनी लोगों द्वारा अमेरिकी वस्तुओं का बहिष्कार ]
Notes:
चीनी लोगों द्वारा अमेरिकी वस्तुओं का बहिष्कार 1905 में किया था, और बंगाल में भी उससे प्रेरित होकर 1905 में ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार किया गया। यह बहिष्कार बंगाल के विभाजन के विरोध में किया गया था।


7.साइमन कमीशन की नियुक्ति किस वाइसराय के कार्यकाल में की गयी?
[A] लार्ड वेलिंगटन
[B] लार्ड इरविन
[C] लार्ड रीडिंग
[D] लार्ड चेम्सफोर्ड

Correct Answer: B [लार्ड इरविन]
Notes:
साइमन कमीशन का गठन सर जॉन अल्ल्सेब्रूक साइमन की अध्यक्षता में किया गया था, इस आयोग में ब्रिटिश संसद के 7 सदस्य थे। यह कमीशन 1928 में भारत में पहुंचा, इसका गठन नवम्बर, 1927 में किया गया था। इस आयोग का उद्देश्य भारत में संवेधानिक सुधार की प्रगति का निरिक्षण करना था।

8.इनमे से किन व्यक्तिओं की विचारधारा समान थी?
[A] गोपाल कृष्ण गोखले और बाल गंगाधर तिलक
[B] बाल गंगाधर तिलक और दादाभाई नोरोजी
[C] चितरंजन दास और मोती लाल नेहरु
[D] सुभाष चन्द्र बोस और डॉ. पट्टाभी सीतारमैया

Correct Answer: C [चितरंजन दास और मोती लाल नेहरु ]
Notes:
चितरंजन दास ने स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान “स्वराज” पार्टी की स्थापना की थी।  वे अनुशीलन समिति से भी जुड़े रहे।  मोतीलाल नेहरु भी स्वराज पार्टी के सदस्य थे।

9.निम्नलिखित में से किस गवर्नर के कार्यकाल में अंग्रेजों ने कुर्ग पर कब्ज़ा किया?
[A] लार्ड विलियम बेंटिंक
[B] लार्ड ऑकलैंड
[C] लार्ड एलेनबोरो
[D] लार्ड कॉर्नवालिस

Correct Answer: A [लार्ड विलियम बेंटिंक ]
Notes:
1834 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और कुर्ग के राजा के बीच एक लघु युद्ध हुआ, इस युद्ध में कुर्ग के राजा की हार हुई और कुर्ग पर अंग्रेजों का कब्ज़ा हो गया। इस दौरान लार्ड विलियम बेंटिंक गवर्नर जनरल थे।

10.“फैथ इज ए बैटल” किसकी जीवनी है?
[A] मोहम्मद अली जिन्नाह
[B] खान अब्दुल गफ्फार खान
[C] मौलाना अबुल कलाम आजाद
[D] उपरोक्त में से कोई भी नहीं

Correct Answer: B [खान अब्दुल गफ्फार खान ]
Notes:
“फैथ इज ए बैटल” अब्दुल गफ्फार खान की जीवनी है, इस पुस्तक को डी.जी. तेंदुलकर ने लिखा था।

प्राचीन भारत का इतिहास - सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी

प्राचीन भारत का इतिहास - सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी

1.इन में से किस अभिलेख में “भारतवर्ष” नाम का ज़िक्र मिलता है?
[A] भाब्रू अभिलेख
[B] मोगा का ताम्र अभिलेख
[C] इलाहाबाद का अभिलेख
[D] हाथीगुम्फा अभिलेख

Correct Answer: D [हाथीगुम्फा अभिलेख ]
Notes:
ओडिशा के खारवेल के द्वारा हाथीगुम्फा अभिलेख (inscription) में “भारतवर्ष” का ज़िक्र मिलता है।

2.निम्नलिखित कार्यों में से कौन सा कार्य करने के लिए अशोक ने  राजुक्यों को नियुक्त किया था?
[A] राजस्व कार्य
[B] न्यायिक कार्य
[C] धार्मिक कार्य
[D] सैन्य कार्य

Correct Answer: B [न्यायिक कार्य]
Notes:
न्यायिक कार्य

3.आधुनिक भारत की लिपियों में से कौन सी सारदा लिपि से अवतरित है?
1-गुरुमुखी
2-डोगरी
3-सिंधी
[A] केवल 1
[B] केवल 1 और 3
[C] केवल 2 और 3
[D] 1,2 और 3

Correct Answer: D [1,2 और 3]
Notes:
सारदा लिपि, लिपियों  के ब्राह्मी परिवार की एक लिपि है, जो 8 वीं शताब्दी के आसपास विकसित हुई था। इसे संस्कृत और कश्मीरी लिखने के लिए इस्तेमाल किया गया था| गुरू अंगद द्वारा गुरुमुखी लिपि लिखी गई थी। मूल रूप से अधिक व्यापक रूप से इसका इस्तेमाल बाद में कश्मीर तक ही सीमित हो गया था, और यह अब केवल कश्मीरी पंडित समुदाय के  औपचारिक उद्देश्यों के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। डोगरी लिपि, कुलुई स्क्रिप्ट (हिमाचल प्रदेश में कुल्लू), चमेली लिपि (चंबा हिमाचल प्रदेश में), सिंधी, पंजाब की बनिया, आदि सारदा लिपि के कई रूप हैं।

4.सिध्दिमात्रिका लिपि प्राचीन भारत में संस्कृत के कई रूपों में से एक थी| इस लिपि ने संस्कृत के कई शब्दों का प्रचलन चीन और जापान में कराया| इसका विकास किसके काल में हुआ?
[A] कनिष्क
[B] हर्ष
[C] मिनांडर
[D] चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य

Correct Answer: B [हर्ष]
Notes:
यह लिपि हर्ष के समय विकसित हुई| इसे ‘हर्ष लिपि’ भी कहा जाता है|

5.कालिदास के सम्बन्ध में कौन सा कथन गलत है?
[A] कालिदास संस्कृत के विद्वान और नाटककार थे|
[B] वह चन्द्रगुप्त प्रथम के नवरत्नों में से थे|
[C] कुमारसंभवम् और ऋतुसंहार उनके महाकाव्य हैं|
[D] उनकी रचनाएं और कवितायें हिन्दू पुराण और दर्शन पर आधारित हैं|

Correct Answer: B [वह चन्द्रगुप्त प्रथम के नवरत्नों में से थे|]
Notes:
[कालिदास चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के नवरत्नों में से थे|]

6.आयहोल शिलालेख निम्न में से किसका है?
[A] पुलिकेशन द्वितीय
[B] रुद्रदामन
[C] खारवेल
[D] अशोक

Correct Answer: A [पुलिकेशन द्वितीय]

7.‘व्यवहार समता’ और ‘दंड समता’ नामक दो कानून किसने चलाये?
[A] चंद्रगुप्त मौर्य
[B] अशोक
[C] चंद्रगुप्त विक्रमादित्य
[D] समुद्रगुप्त

Correct Answer: B [अशोक]

8.‘मुद्राराक्षस’ नामक भारतीय नाटक की पृष्ठभूमि है:-
[A] देवासुर संग्राम
[B] राक्षस और राजकुमारी की प्रेमकथा
[C] एक आर्यपुरुष और नर्तकी की प्रेमकथा
[D] चंद्रगुप्त मौर्य के राज्यतिलक के दौरान साजिश

Correct Answer: D [चंद्रगुप्त मौर्य के राज्यतिलक के दौरान साजिश]

9.निम्न में से किसने चिकित्सा के क्षेत्र में काम किया?
[A] सौमिल्य
[B] शूद्रक
[C] कालिदास
[D] सुश्रुत

Correct Answer: D [सुश्रुत]
Notes:
सुश्रुत एक प्रख्यात चिकित्साशास्त्री थे जिन्होंने प्लास्टिक सर्जरी की खोज की।

10.किस बौद्ध संगीति में बौध्द धर्म दो पंथ स्थविरवाद और महासंघिकास में बंट गया
[A] प्रथम बौध्द संगीति
[B] द्वितीय बौध्द संगीति
[C] तृतीय बौध्द संगीति
[D] चतुर्थ बौध्द संगीति

Correct Answer: B [द्वितीय बौध्द संगीति]

World History Questions In Hindi

World History Questions In Hindi

1.फ्रांस की क्रांति का तत्कालीन कारण क्या था?

[A] बास्तिल का पतन
[B] आर्थिक संकट
[C] लूई सोलहवें की हत्या
[D] निरंकुश शासन


Correct Answer: B [आर्थिक संकट]
Notes:
फ्रांस की क्रांति का तत्कालीन कारण आर्थिक संकट था|

2.नेपोलियन बोनापार्ट ने जब ब्रिटिश के आगे समपर्ण कर दिया तो उसे किस द्वीप पर भेजा गया था?
[A] सेंट हेलेना, उतर अंटलांटिक
[B] सेंट हेलेना, दक्षिण अंटलांटिक
[C] कोमरो द्वीप समूह, हिंद महासागर
[D] इनमें से कोई नहीं

Correct Answer: B [सेंट हेलेना, दक्षिण अंटलांटिक]
Notes:
नेपोलियन बोनापार्ट ने जब ब्रिटिश के आगे समपर्ण कर दिया तो उसे सेंट हेलेना, दक्षिण अंटलांटिक द्वीप पर भेजा गया था|

3.22 जनवरी 1905 रूस के इतिहास में जाना जाता है?
[A] खूनी मंगलवार
[B] ख़ुशी के घंटे
[C] खूनी रविवार
[D] श्वेत पत्र दिवस


Correct Answer: C [खूनी रविवार]
Notes:
22 जनवरी 1905 रूस के इतिहास में खूनी रविवार के रूप में जाना जाता है|

4.‘लीग ऑफ़ नेशन्स’ अपने जन्म के समय कहाँ पर स्थित था?
[A] वेनिस
[B] हेग
[C] जिनेवा
[D] न्यूयॉर्क

Correct Answer: C [जिनेवा]
Notes:
‘लीग ऑफ़ नेशन्स’ अपने जन्म के समय जिनेवा पर स्थित था|


5.राष्ट्र संघ के पतन का मुख्य कारण क्या था?
[A] उग्रवादी राष्ट्रवाद
[B] बड़ी पंक्तियों की स्वार्थपरता
[C] युद्धक शक्ति की कमी
[D] वर्साई की संधि

Correct Answer: B [बड़ी पंक्तियों की स्वार्थपरता]
Notes:
राष्ट्र संघ के पतन का मुख्य कारण बड़ी पंक्तियों की स्वार्थपरता था|


6.प्रथम महायुद्ध में किस राष्ट्र ने प्रजातंत्र को बचाने के लिए भाग लिया था?
[A] फ़्रांस
[B] जर्मनी
[C] संयुक्त राज्य अमेरिका
[D] रूस


Correct Answer: C [संयुक्त राज्य अमेरिका]
Notes:
प्रथम महायुद्ध में संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रजातंत्र को बचाने के लिए भाग लिया था|

7.रोमन साम्राज्य बहुत विस्तृत था और आगस्टस के बाद शासक की नियुक्ति का आधार होता था?
[A] आनुवाशिंक
[B] सैन्यशक्ति
[C] सीनेट का समर्थन
[D] योग्यता

Correct Answer: A [आनुवाशिंक]
Notes:
रोमन साम्राज्य बहुत विस्तृत था और आगस्टस के बाद शासक की नियुक्ति का आधार आनुवांशिक होता था|

8.इटली का एकीकरण किस वर्ष के अंतगर्त हुआ था?
[A] ब्रूबो
[B] सेवाय
[C] हेनौवर
[D] हैब्सबर्ग

Correct Answer: B [सेवाय]
Notes:
इटली का एकीकरण सेवाय के अंतगर्त हुआ था|

9.सिन्धु सभ्यता की क्या विशेषता रही है?
[A] पिरामिड
[B] विशाल स्नानाघर
[C] जिग्गूरात
[D] हैगिंग गार्डन

Correct Answer: B [विशाल स्नानाघर]
Notes:
विशाल स्नानाघर सिन्धु सभ्यता की विशेषता रही है|

10.यूरोप में धार्मिक आन्दोलन के पुनर्जागरण काल में विकसित होने का निम्न में से कौनसा कारण था?
[A] यह धर्म से संबंधित था
[B] चर्च के ऊपर प्रतिबंध लगाना एवं भ्रष्टाचार को समाप्त करना
[C] आन्दोलन को राष्ट्रीय राजतंत्र से प्रेरित करना था
[D] जनता का धर्म के क्षेत्र में आध्यात्मिक की और झुकाव

Correct Answer: C [आन्दोलन को राष्ट्रीय राजतंत्र से प्रेरित करना था]
Notes:
यूरोप में धार्मिक आन्दोलन के पुनर्जागरण काल में विकसित होने का कारण आन्दोलन को राष्ट्रीय राजतंत्र से प्रेरित करना था|

History GK Questions and Answers for Competitive Exams

History GK Questions and Answers for Competitive Exams

1. Arabs were defeated in 738 A.D. by….

(A) Pratiharas

(B) Rashtrakutas

(C) Palas

(D) Chalukyas


Ans .D


2. Harshvardhan was defeated by….

(A) Prabhakaravardhana

(B) Pulakesin II

(C) Narasimha Varma Pallavas

(D) Sasanka

Ans .B



3. Beetapala and Dhiman, the two great artists that India had produced, belonged to the……

(A) Pala Age

(B) Gupta Age

(C) Mauryas Age

(D) Rathan Age

Ans .A

4. Chalukyas king Pulakesin II was defeated by….

(A) Mahendra Varman 1

(B) Narasimha Varman 1

(C) Parameswara Varman 1

(D) Jatila Parantaka

Ans .B


5. The most distinguished ruler of the Chalukyas dynasty was…..

(A) Jayasimha II

(B) Vikarmaditya VI

(C) Somesvara II

(D) Pulakesin II

Ans .D

6. Which ruler founded the famous Vikramshila University for the Buddhists?

(A) Mahi Pala

(B) Devapala

(C) Gopala

(D) Dharmapala

Ans .D


7.Who among the following were the first to invade India?

(A)Afghan

(B) Mongols

(C) Arabs

(D) Turks

Ans .C


8. Which rulers built the Ellora temples?

(A) Chalukyas

(B) Sunga

(C) Rashtrakutas

(D) Pallavas

Ans .C


9. The famous rock-cut temple of Kailasa is at ……

(A) Ajanta

(B) Badami

(C) Mahabalipuram

(D) Ellora

Ans .D


10. The Rathas of Mahabalipuram was built during the reign of the…….

(A) Palas

(B) Cholas

(C) Rashtrakutas

(D) Pallavas

Ans .D


Indian History

11. Which Rashtrakutas ruler built the famous Kailash temple of Siva at Ellora?

(A) Dantidurga

(B) Amoghvarsha 1

(C) Krishan 1

(D) Vats raj

Ans .C

12. The Rashtrakutas kingdom was founded by……

(A) Dandi Durga

(B) Amoghvarsha

(C) Govinda III

(D) Indra III

Ans .A.

13. The paintings in the Ajanta and Ellora caves are indicative of development of art under the……

(A) Rashtrakutas

(B) Pallavas

(C) Pandya’s

(D) Chalukyas

Ans .A


14. The famous Kailas temple cut out of the solid rock at Ellora was built under the patronage of the….

(A) Cholas

(B) Kadambas

(C) Pallavas

(D) Rashtrakutas

Ans .D



15. Who established Mahabalipuram?

(A) Pallavas

(B) Pandya

(C) Chola

(D) Chalukyas

Ans .A

16. Name the capital of the Pallavas?

(A) Kanchi

(B) Vatapi

(C) Trichinopoly

(D) Mahabalipuram


Ans .A

17. The Seven Pagodas of Mahabalipuram are a witness to the art patronized by the….

(A) Pallavas

(B) Pandya’s

(C) Cholas

(D) Chera

Ans .A

18.Rath temple at Mahabalipuram was built in the reign of which Pallav ruler?

(A) Mahendra Varman 1

(B) Narasimha Varman 1

(C) Parmeshwar 1

(D) Nandi Varman 1

Ans .B

19. The first Indian ruler, who established the supremacy of Indian Navy in the Arabian Sea was….

(A) Raja raja 1

(B) Rajendra 1

(C) Rajadhiraja 1

(D) Kulottunga 1

Ans .A

20. Where is Brihadeshwara Temple situated?

(A) Kanchi

(B) Madurai

(C) Shri Shailan

(D) Tanjore

Ans .D

ऐतिहासिक भाषाशास्त्र

ऐतिहासिक भाषाशास्त्र
काळानुरूप भाषेतील बदलांचा अभ्यास

विविध कालखंडांतील भाषेच्या स्वरूपांचा अभ्यास ऐतिहासिक भाषाशास्त्रात केला जातो. निरनिराळ्या काळखंडांतील भाषा, तिचे बदलते स्वरूप आणि तिच्यात आलेल्या शब्दांच्या उत्पत्तीचे सिद्धान्त या सर्वांचा विचार ऐतिहासिक भाषाशास्त्रात केला जातो. भाषा ही सतत बदलणारी असते. मराठी भाषेच्या यादवकालीन मराठी भाषा, बहामनीकालीन मराठी भाषा, शिवकालीन मराठी भाषा अशा अनेक पायऱ्या आहेत. भाषेच्या संदर्भात ध्वनी, शब्द, प्रत्यय, शब्दार्थ अशा विविध घटकांमधे बदल होत असतात. आर्यभाषेपासून वैदिक भाषा अशाच काही भाषा निर्माण होत गेल्या, त्या सर्व भाषांचा अभ्यास भारतीय ऐतिहासिक भाषाविज्ञानात केला जातो. भाषेच्या बाबतीत कालानुक्रमे वर्गीकरण करणे, ऐतिहासिक विवेचन करणे, भाषेची अन्य भाषांशी तुलना करणे अशा प्रकारचा अभ्यास या शास्त्रात होतो.

भाषेचा अभ्यास प्राचीन काळापासून त्या काळाच्या शास्त्रानुसार हा अभ्यास केला जात असे. हा अभ्यास तत्त्वज्ञान, तर्कशास्त्र, धर्मशास्त्र, इतिहास या क्षेत्रातील भाषेच्या प्रश्नाची उत्तरे शोधण्यातून होत असे. बायबलमध्ये, पूर्वी एकच भाषा होती; परंतु देवानेच माणसांना भिन्न भिन्न भाषा दिल्या अशी भाषेची उत्पत्ती सांगितली आहे. या काळात भाषाविषयक अनेक गैरसमजुती होत्या. प्राचीन काळात ग्रीक आणि लॅटिन या श्रेष्ठ भाषा तर इंग्लिश, ही भ्रष्टभाषा अशी समजूत होती. दुसऱ्या एका समजुतीनुसार एकच भाषा असेल तरच समाजात एकोपा टिकून राहील; भाषा वैविध्य आले की, संघर्ष सुरू होतो, असे मत प्रचलित होते. भाषेच्या अभ्यासाच्या दृष्टीने पुढे धर्मग्रंथ, महाकाव्ये, हस्तलिखिते यांची चिकित्सा शैलीच्या अनुषंगाने करून या ग्रंथाचा काळ ठरवण्यात आला आणि अशा अभ्यासाला ‘भाषाभ्यास’ (Philology) असे नाव देण्यात आले.[१]

ऐतिहासिक भाषाशास्त्राची पार्श्वभूमी संपादन करा
सोळाव्या व सतराव्या शतकात भौगोलिक शोध आणि सांस्कृतिक निरीक्षणे यामुळे बायबल मधील कथा; इतिहास आणि भूगोल यांच्या कसोट्यावर टिकू शकल्या नाहीत. या अभ्यासातून अनेक शंका आणि भाषेचे वैविध्य समोर आले. या वैविध्यामुळे भाषा-भाषेमधला सारखेपणा दिसू लागला. या भाषा अभ्यासातून बायबलने सांगितलेला सहा हजार वर्षाचा काळ कमी वाटू लागला.

बायबलची अशी चिकित्सा सुरू झाल्यानंतरच खऱ्या अर्थाने भाषेच्या ऐतिहासिक अभ्यासाला प्रारंभ झाला. पुढे विसाव्या शतकात आधुनिक भाषाशास्त्राचा उगम झाल्यानंतर भाषेचा अभ्यास करण्याच्या अनेक पद्धती उदयास आल्या. त्यापैकी एक म्हणजे ऐतिहासिक भाषाभ्यास पद्धती होय. ही भाषाशास्त्रातील एक महत्त्वाची शाखा असून भाषा कशी जन्मली किंवा भाषेचे मूळ काय, या प्रश्नांच्या उत्तरातून भाषेच्या ऐतिहासिक अभ्यासाला सुरुवात झाली आहे.

ऐतिहासिक भाषाशास्त्राचा विकास संपादन करा
या ऐतिहासिक भाषाशाश्त्राचा उत्कर्ष १९ व्या शतकात युरोपमध्ये झाला. त्या काळात ही अभ्यासपद्धती शास्त्रीय व वैज्ञानिक मानली जात असे. १८५७ च्या आसपास ऐतिहासिक भाषाशास्त्रत दोन भाषांमधील कुलसंबंधाच्या संशोधनाला प्रतिष्ठा प्राप्त झाली होती. इतकी की, डार्विननेही त्याला आदर्श मानूनच ‘मानवी उत्क्रांतीचा सिद्धांत’ मांडला. आधुनिक भाषाशास्त्राचा जनक सोस्यूरनेही सुरुवातीच्या काळात ऐतिहासिक भाषाशास्त्राचा अभ्यास केलेला आहे.

            विद्येच्या प्रसारानंतर युरोपीय लोक जगाच्या पाठीवर वेगवेगळ्या राज्यात जाऊन राज्य करू लागले. त्यामुळे परकीय संस्कृती आणि परकीय भाषा यांचा अभ्यास होऊ लागला. याच प्रक्रियेतून भारतात संस्कृत भाषेचा अभ्यास भाषाशास्त्राच्या क्षेत्रात क्रांतिकारक ठरला. १७८६ साली सर विल्यम जोन्स याने संस्कृत, ग्रीक आणि लॅटिन या भाषांमधील साम्य पाहून या भाषांची एकाच जननी असावी असा विचार मांडला. त्यामुळे जोन्सला भाषांचे ऐतिहासिक संशोधन करावे लागले आणि भाषांची तुलना करावी लागली. या भाषांचा तुलनात्मक अभ्यास केल्यानंतर दोन भाषांमधील साम्याचा अभ्यास करून ध्वनिपरिवर्तनाचे नियम तयार करण्यात आले. त्यातून संस्कृत, ग्रीक, लॅटिन या भाषांमागे इसवीसनपूर्व तीन हजार वर्ष ‘आदी-इंडोयुरोपियन’ ही भाषा असावी असा तर्क मांडण्यात आला आणि यातील भाषांना भाषा- भगिनी ठरवण्यात आले. त्यांची भाषाकुले व उपकुले वृक्षाकृतीच्या आधारे दाखवण्यात आले.

ऐतिहासिक भाषाशास्त्राच्या मर्यादा संपादन करा
ऐतिहासिक भाषाशास्त्राच्या मर्यादा

            ऐतिहासिक भाषाशास्त्राची पद्धती रूढ झाली असली तरी भाषाशास्त्राच्या मर्यादाही आहेत. एक म्हणजे, या अभ्यासासाठी जी भाषिक सामग्री घेतली जाई, ती मृत भाषामधील लिखित सामग्री असे आणि त्यावरून अनुमाने केली जात. मात्र भाषेच्या ध्वनींविषयी, लिखित व मौखिक बोली स्वरुपात नेमका संबंध काय, याचा शोध घेतल्याशिवाय या तऱ्हेच्या अभ्यासावरून योग्य ते परिवर्तनाचे नियम हाती लागू शकणार नाही. ही या अभ्यासपद्धतीची मोठी मर्यादा आहे.

            दुसरे म्हणजे, ‘जनन’ ही कल्पना भाषांच्या बाबतीत बरीच रूपकात्मक वापरावी लागते. जितकी ती वनस्पती व प्राणी उत्क्रांतीबद्दल वापरता येते तितकी भाषेबाबत वापरता येत नाही.

            तिसरे म्हणजे, आदिभाषेची कल्पना मानताना करताना ती भाषा एकजिनसी स्वरुपाची असणे गरजेचे असते. मात्र भाषा परिवर्तनाचे नियम भाषा इतिहासाच्या काही टप्प्यात अधिक लागू पडतात तर काही टप्प्यात तितकेसे लागू पडत नाही. आणि असे का होते, याचे स्पष्टीकरण या अभ्यासपद्धतीत मिळत नाही.

ऐतिहासिक भाषाशास्त्राबाबत काही प्रश्न संपादन करा
भाषिक बदलाचे व त्यामागील नियमित तत्त्वांचे काटेकोर वर्णन देण्यात ऐतिहासिक भाषाअभ्यासाने प्रगती केली असली तरी १९ व्या शतकाच्या अखेरीस या अभ्यासपदाहती संदर्भात काही मुलभूत स्वरूपाच्या शंका उपस्थित होऊ लागल्या. या अभ्यासपद्धतीची ही मोठीच मर्यादा आहे.

            एक म्हणजे भाषानाधील किंवा भाषाकुलामधील जनन-संबंध शोधत असताना जनक किंवा आदिभाषेचे स्वरूप निश्चित करता येणे खरोखर शक्य आहे का? दुसरे, साऱ्या भाषांची आधी एकजिनसी भाषा अस्तित्वात होती, याला वस्तुनिष्ठ कसलाही पुरावा नाही. भाषांचे स्वरूप पुनर्रचित असेच राह्रणार. त्यामुळे आदिभाषेच्या अस्तित्वाविषयी व स्वरूपाविषयी शंकाच राहते. भाषा सतत बदलत असल्यामुळे बदल हा अमुक ठिकाणपासून झाला असे मानता येत नाही. तेव्हा विशिष्ट बिंदूपासून परिवर्तनाचे वर्णन करणे सोयीचे नाही.

            तिसरे असे की,  भाषाकुळातील जननसंबंध शोधत मागे मागे गेल्यास भाषांची वा कुळांची संख्या कमी कमी होत गेली पाहिजे; ती तशी होताना दिसत नाही. याचा अर्थ ‘जनन’ ही संकल्पना मानवी कुलाला जशी लागू पडते, तशीच ती भाषाकुलाला लागू पडत नाही.

            चौथे म्हणजे, एक भाषा संपून दुसरी भाषा कुठे सुरू झाली ते भौगोलिकदृष्ट्या ठरवणे जितके अवघड तितकेच ऐतिहासिक दृष्ट्या ठरवणे अवघड. भाषाकुल आकृत्या जितक्या रेखीव व सुटसुटीत वाटतात तितक्याच भाषा प्रत्यक्षात गुंतागुंतीच्या असतात. अशा मर्यादा समोर आल्यामुळे ऐतिहासिक व तौलनिक भाषाअभ्यासपद्धतीपेक्षा वेगळी अभ्यास पद्धती असते अशी जाणीव निर्माण करण्याचे कार्य सोस्यूरने केले. त्यातून पुढे वर्णनानात्मक भाषापद्धतीचा विचार पुढे आला

महर्षी कर्वे

पुनर्विवाह : महर्षी कर्वे

त्यांच्या सहचारिणी राधाबाई कालवश झाल्या, त्या वेळी अण्णांचे वय पंचेचाळीसच्या आसपास होते. प्रौढ वयात विधुर झालेल्या पुरुषानेही अल्पवयीन कुमारिकेशीच लग्न करण्याची त्या काळात प्रथा होती.

लहान वयात मुलींची लग्ने होत, पण दुर्दैवाने पती लवकर मरण पावला तर त्या मुलीला मात्र त्याची विधवा म्हणून उर्वरित आयुष्य घालवावे लागे. ही समाज रीत नाकारणाऱ्या अण्णांनी पंडिता रमाबाईंच्या शारदा सदन संस्थेत शिकणाऱ्या गोदूबाई या विधवा मुलीशी पुनर्विवाह केला.

ही गोष्ट काळाला मानवणारी नव्हती. अण्णा पत्‍नीसह मुरूडला गेल्यानंतर अण्णांवर सामाजिक बहिष्कार टाकण्याचा ठराव संमत झाला. याच गोदूबाई पुढे आनंदी कर्वे किंवा बाया कर्वे म्हणून ख्यातनाम झाल्या. अण्णासाहेबांच्या कार्यात बाया कर्वे यांचा सक्रिय वाटा होता.

अण्णांचा पुनर्विवाह ही व्यक्तिगत बाब नव्हती; घातक सामाजिक प्रथांविरुद्ध केलेले ते बंड होते.

पुनर्विवाहासाठी लोकमताचे जागरण करावे, या हेतूने २१ मे, इ.स. १८९४ या दिवशी अण्णांनी पुनर्विवाहितांचा एक कुटुंबमेळा घेतला. याच सुमारास अण्णांनी ‘विधवा विवाह प्रतिबंध निवारक‘ मंडळाची स्थापना केली. विधवा-विवाहाला विरोध करणाऱ्या प्रतिगामी प्रवृत्तींना आवर घालणे हे या मंडळाचे काम होते.

बालविवाह, जरठ-कुमारी विवाह, केशवपन यासारख्या अन्याय्य रूढींत अडकलेल्या अनिकेत स्त्रियांना मोकळा श्वास मिळावा म्हणून इ.स. १८९६ मध्ये अण्णांनी सहा विधवा महिलांसह ‘अनाथ बालिकाश्रम‘ काढला. ‘विधवा विवाहोत्तेजक‘ मंडळाची स्थापना केली.

विधवाविवाह न्याय संमत मानला जात नव्हता अशा काळामध्ये अण्णांनी विधवा विवाहाचा आग्रह धरून समाजाच्या मानसिकतेमध्ये बदल करण्यासाठी चळवळ उभी केली या चळवळीचा एकूणच परिणाम म्हणजे या काळामध्ये पुनर्विवाह साठी समाजाची मानसिकता तयार होऊ लागली रावबहादूर गणेश गोविंद गोखले यांनी अण्णांचे हे उदात्त कार्य पाहून हिंगणे येथील आपली सहा एकरांची जागा आणि रु. ७५० संस्थेच्या उभारणीसाठी अण्णांकडे सुपूर्द केले. या उजाड माळरानावर अण्णांनी एक झोपडी बांधली. ही पहिलीवहिली झोपडी ही हिंगणे स्त्रीशिक्षण संस्थेची गंगोत्री. आज अनेक वास्तूंनी गजबजून गेलेल्या या वैभवसमृद्ध परिसरात अण्णांची झोपडी त्यांच्या तपाचे महाभारत जगाला सांगत उभी आहे.

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